Tuesday, May 3, 2011


आख़िर ओसामा का हुआ अंत..
ओसामा बिन लादेन
दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन का सरगना और दुनिया भर के आतंकियों का सरपरस्त खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन आखिरकार 1-2 मई 2011 की दरम्यानी रात को अमेरिकी हमले में मारा गया..अमेरिकी विशेष कमाडोज़ दस्ते सील-6 ने चालीस मिनट के गुप्त ऑपरेशन में पाकिस्तान की राजधानी इस्लमाबाद से महज 150 किलोमीटर दूर स्थित ऐबटाबाद की एक हवेली में मारा गया. ओसामा को ढेर करने के कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी जल्दी से यकीन नहीं होने वाली इस ख़बर की आधिकारिक पुष्टि कर दी.. 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा
अमेरिका में जश्न का माहौल था..लोग झूम-झूम कर व्हाइट हाउस के सामने नाच गाकर अपनी खुशी का इज़हार कर रहे थे..आखिर उनके दुश्मन नंबर एक को उनके जांबाज सैनिकों ने घात लगाकर ढेर कर दिया..11 सितंबर 2001 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन में हुए हमले के मास्टरमाइंड ओसामा की मौत अमेरिकियों के लिए नौ ग्यारह के हमले का इंतकाम था..इस हमले में तीन हजार लोगों की मौत हुई थी.. 
अमेरिकी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर(ट्विन टॉवर)
जबकि हजारों लोग इन हमलों में घायल हो गए थे..बराक ओबामा ने ओसामा की मौत को नौ ग्यारह हमले के पीड़ितों के लिए इंसाफ बताया..ओबामा ने कहा कि उनकी लड़ाई आतंकवाद से है न कि इस्लाम से..दरअसल 1 मई की रात करीब एक बजे अमेरिकी कमांडोज़ ने घात लगाकर ओसामा पर हमला किया..और इस बार अलकायदा का दुर्दांत सरगना उन्हें चकमा नहीं दे पाया..और अमेरिकी जवानों की गोलियों का शिकार हो गया. उधर, ओसामा की मौत की ख़बर जैसे ही अमेरिकी मीडिया के हवाले से दुनिया भर में फैली..तो जैसे तहलका मच गया..हर चैनल जो भी इस ख़बर को चला रहा था..उसे पहले क्रॉस चैक ज़रूर कर रहा था कि खबर पुख्ता ही है न...और चंद सैंकड़ों में सभी को यकीन हो चुका था कि हां दुनिया में आतंक का पर्याय बन चुका महाखलनायक ओसामा का हमले में अंत हो गया है..तभी सभी चैनलों पर ओबामा की खबर चलने लगी..और जैसे ही चैनलों के ज़रिए ये खबर आम लोगों तक पहुंची..तो जैसे सभी लोग इस बात की खुशी मनाने मे जुट गए कि चलो मानवता के इस दुश्मन और महादानव का अंत हो ही गया.. वैसे अमेरिकियों के साथ-साथ पूरी दुनिया के लोगों के लिए भी ये खबर सुकून देने वाली थी..खास कर आतंकी हमलों के पीड़ितों के लिए तो जैसे ये खबर जख्म पर मरहम के समान थी..दुनियाभर के आतंकियों का सरपरस्त,कुख्यात आतंकवादी, सबसे वांछित आतंकी ओसामा बिन लादेन उन्हीं बंदूकों की गोलियों से अपनी ज़िंदगी हार गया..जिन बंदूकों के दम पर उसने दुनिया में आतंक फैलाने का अपना नापाक ख्वाब पाले रखा था. ओसामा की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिकी अधिकारियों ने उसे समंदर में दफना दिया..वैसे इस कुख्यात आतंकी के साथ थोड़ी सहानुभूति अधिकारियों ने दिखाई कि समंदर में उसके शव को बहाने के पहले इस्लामी रीति-रिवाजों से उसका अंतिम संस्कार किया गया..मानवता के दुश्मन नंबर एक के साथ थोड़ी बहुत मानवता दिखाना वाकई आश्चर्य कर देने वाला था. वैसे इससे ये भी पता चलता है कि मानवता दुश्मन के साथ भी सहानुभूति रखने का पाठ पढ़ाती है. ओसामा की मौत का अमेरिका समेत पूरी दुनिया में जश्न मनाया गया.
ओसामा के पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से महज़ डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर किसी घर में छिपा होना..भारत के उन दावों को और पुख्ता करता है जिनमें भारत बार-बार ये कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंकियों की पनाहगाह है..ओसामा की मौत के बाद भारतीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने एक बार फिर से 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के आरोपियों पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान से कहा है..उन्होंने कहा कि ये अब एक बार फिर से साफ हो गया है कि पाकिस्तान आतंकियों की पनाहगाह है. साथ ही पाकिस्तान की आतंकियों को शह देने की पाक की करतूत एक बार फिर से दुनिया के सामने बेनकाब हो गई है. साथ ही ये बात किसी भी तरह से नहीं पचती कि दुनिया का दुर्दांत आतंकी पाक की राजधानी से महज डेढ़ सौ किलोमीटर किसी ठिकाने पर छिपा हो...और पाकिस्तान को पता न हो..आपको बता दूं कि ओसामा का ऐबटाबाद स्थित ठिकाना पाकिस्तान सैन्य अकादमी से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित था.
आतंकवाद का कोई धर्म,कोई देश,कोई जाति और कोई वंश नहीं होता.. इसलिए ओसामा का मारा जाना आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया में चल रही लड़ाई की एक बड़ी उपलब्धि तो है..लेकिन आतंकवाद के सफाए के लिए अभी कई साल और लग सकते हैं..और इसके खिलाफ अभी और लड़ाई लड़नी है..जैसे कि आतंकियों के सरगना को ढेर करने में अमेरिका को दस साल लग गए..यानी अभी लड़ाई को और समय के लिए जारी रखा जाना चाहिए..ओसामा की मौत से ज्यादा गदगद होने की ज़रूरत नहीं है...क्योंकि अल जवाहिरी जैसै और भी खूंखार आंतकी जिंदा है..जो दुनिया भर में आतंक फैला रहे हैं..हालांकि तहरीक--तालिबान ने दावा किया है कि ओसामा अभी ज़िंदा है..वैसे अगर ओसामा जिंदा है तो कहां है..वो सामने क्यों नहीं आता..
पूरी दुनिया में आतंक के पर्याय ओसामा ने कितने बड़े-बड़े हमलों को अंजाम दे सैंकड़ों लोगों की जान ली..डालते हैं उन पर एक नज़र..
-26 फरवरी 1993 : न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर टॉवर के बेसमेंट में विस्फोट, 6 की मौत, 1000 लोग घायल। इमारत की नींव को भारी नुकसान।

-13नवबंर 1995: सऊदी अरब के रियाद में सऊदी नेशनल गार्ड और यूएस मिल्रिटी एडवाइजर वर्क के ऑफिस के बाहर कार बम विस्फोट, 5 अमेरिकी सैनिक और दो भारतीयों की मौत।


-25 जून 1996 : सऊदी अरब के धाहरन स्थित अमेरिकी सेना के बेस कैंप पर ट्रक बम से हमला। 19 अमेरिकियों की मौत और 386 लोग घायल।
-7 अगस्त, 1998: नैरोबी और डार-एस-सलाम के अमेरिकी दूतावासों पर हमला। 224 लोगों की मौत और करीब 5000 लोग घायल।
-12 अक्टूबर, 2000 : अमेरिकी विमानवाहक पोत कोल पर आतंकी हमला। 17 यूएस मैरीन्स मारे गए और 38 लोग घायल हुए।
-11 सितंबर, 2001 : अमेरिका पर सबसे बड़ा हमला। दो अपह्त विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराया। दोनों इमारतें ढेर। तीसरे अपह्त विमान से वाशिंगटठन के पेंटागन पर हमला। चौथा विमान पेंसिलवेनिया के ग्रामीण क्षेत्र में क्रैश। कुल 3000 लोग मारे गए और हजारों घायल।
-11 अप्रैल, 2002 : ट्यूनिशिया के द्वीप जेरबा में ट्रक से हमला, 21 मारे गए, जिसमें 14 जर्मन नागरिक।
-12 अक्टूबर, 2002: इंडोनेशिया के बाली में बम विस्फोट, 202 लोगों की मौत। ज्यादातर ऑस्ट्रेलियन।


-12 मई, 2003 : रियाद के तीन आतंकी हमले, 9 अमेरिकियों समेत 35 लोग मारे गए।
-16 मई,2003 : मोरक्को के शहर कसाब्लांका में एक साथ पांच बम विस्फोट, 30 लोगों की मौत।
-15 और 20 नवंबर, 2003: अलकायदा के तुर्की आतंकियों ने इस्तांबुल में ब्रिटिश कांउस्लेट, बैंक पर हमला किया। 63 लोगों की मौत और सैकड़ों।
-2 मार्च, 2004 : बगदाद और करबला में आतंकी हमला। 180 लोगों की मौत।
-11 मार्च, 2004 : मैड्रिड के चार ट्रेनों में विस्फोट। 191 लोगों की मौत, करीब 2000 लोग घायल।
-7 जुलाई, 2005 : चार ब्रिटिश मुस्लिम आत्मघाती हमलावरों ने लंदन के बसों और ट्रेनों पर हमला किया, कुल 56 लोगों की मौत।
-14 अगस्त, 2007 : उत्तरी इराक में बारूद से भरे चार ट्रकों में विस्फोट, 400 लोगों की मौत।
-11 दिसंबर, 2007: अल्जीयर्स में दो आत्मघाती हमले, 41लोगों की मौत।
-20 सितंबर, 2008: इस्लामाबाद के मैरियट होटल पर बड़ा धमाका, 60 की मौत।
-24 नवंबर,2010: यमन में शिया समुदाय के धार्मिक जुलूस पर आत्मघाती हमला। 23 की मौत।

Sunday, April 17, 2011


कोख के क़ातिल
धरती का भगवान इतना दरिंदा हो जाएगा..हमने कभी सोचा भी नहीं होगा..वो इतना घिनौना काम करेगा..चंद रुपयों के लालच में..कोख का सौदा कर देगा.. किसी को सुनकर यकीन भी नहीं हो रहा होगा.. जी हां... धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर इस तरह का कुकृत्य करेंगे..जो किसी महिला को मां बनने के सुख से वंचित कर दे...सुनकर रूह कांप जाती है..यकीन करना मुश्किल होता है.. लेकिन ये सोलह आने सच है..मामला राजस्थान के दौसा जिले का है..जहां के बांदीकुई क्षेत्र के चार निजी अस्पतालों पर आरोप लगा है कि उनके डॉक्टरों ने महज कुछ हजार रुपयों के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत पिछले छह महीने के भीतर गांवों की भोली-भाली करीब 226 महिलाओँ के गर्भाशय निकाल लिए.
ये डॉक्टर महिलाओँ के गर्भाशय निकालने का काम करते ही जाते अगर दौसा में संचालित अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के पदाधिकारी आरटीआई के तहत ये सूचना प्राप्त नहीं करते कि इन महिलाओं को कैंसर जैसी घातक बीमारी का भय दिखाकर इनकी बच्चे दानी निकाल ली जाती थी. कोख के ये काले कारोबारी औरतों को भय दिखाकर बच्चेदानी का ऑपरेशन करवाने को विवश करते थे..वैसे इन महिलाओं को पता तक नहीं होता था कि उन्हें बीमारी से निजात दिलाने के नाम पर ऑपरेशन करने वाले ये डॉक्टर उनके साथ धोखा कर रहे थे..वे बेचारी महिलाएँ नहीं जानती थीं कि ये लोग उनकी जान बचाने के नाम पर उन्हें जिंदगी भर तिल-तिल मरने के लिए छोड़ देने का रास्ता साफ कर रहे थे.. इन धोखेबाज़ डॉक्टरों ने इससे पहले न जाने कितनी ही महिलाओं के गर्भाशय निकालकर उन्हें मातृत्व सुख से वंचित करने का कुकृत्य किया हो. इन दरिंदों ने न जानी कितनी ही भोली भाली महिलाओं को मातृत्व के उस सुख से वंचित कर दिया हो..जिसका इंतजार हर औरत को होता है..हर औरत मां बनने के बाद ही अपने जीवन को धन्य मानती है..महज कुछ हजार रुपयों के लिए इन दरिंदों ने जिस घिनौने काम को अंजाम दिया है..उसके लिए इन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए..इलाज के नाम पर महिलाओँ का शोषण करने वाले इन कोख के कातिलों को सज़ा मिलने से शोषित महिलाओँ का दुख तो कम नहीं होगा.. हां इन्हें सजा मिलेगी..तो आगे कोई और डॉक्टर..डॉक्टरी जैसे ईमानदार और पवित्र पेशे को बदनाम करने की कोशिश नहीं करेगा..और न ही रूपयों के लालच किसी मां की कोख का सौदा करने की हिम्मत कर पाएगा. उधर, मीडिया में ये मुद्दा आने के बाद सरकार थोड़ी हरकत में आई है..दौसा के सीएमएचओ ओ पी मीणा ने इस मामले की जांच की बात कही है..तत्काल प्रभाव से इन चारों निजी अस्पतालों की जननी योजना से संबंद्धता को अस्थाई तौर पर रद्द कर दिया गया है...और अगर जांच में अस्पताल दोषी पाए जाते हैं तो उनकी संबंद्धता स्थाई रुप से रद्द कर दी जाएगी..साथ ही अब ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह ये सुनिश्चित करे कि इस मामले का कोई भी दोषी बच न पाए.
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है
कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है

जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है

होश अपने का भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है

देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,
फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है

हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में
रास्ता है कि कहीं और चला जाता है

दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की
आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।
                                         सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

­संवेदनहीन समाज..मरती मानवता
कहते हैं इंसान-इंसान के काम आता है..और पड़ोसी-पड़ोसी के काम आता है..पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि आप मित्र बदल सकते हैं..पर पड़ोसी नहीं बदल सकते..लिहाज़ा पड़ोसी से आपके संबंध अच्छे होने चाहिए..लेकिन आज शहरी समाज में फ्लैट संस्कृति बड़ी तेजी से पनपी है. अगर तीन फ्लैट आमने-सामने एक ही माले पर हों...तो फ्लैट नंबर एक में रहने वाले को नहीं पता..कि फ्लैट नंबर दो में कौन रह रहा है..यही हाल फ्लैट नं तीन वाले का भी है..उसे भी नहीं मालूम होता कि नंबर एक और दो में कौन रह रहा है...लब्बोलुवाब यही है कि किसी को भी एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं मालूम होता. वैसे तेजी से भागती-दौड़ती जिंदगी में लोग अपने में ही इतने मशगुल होते हैं.. कि पता ही नहीं होता कि उनके अगल-बगल में क्या हो रहा है..हर कोई अपने में ही मस्त है..हर कोई अपनी ही फिक्र में जिंदगी के दिन काट रहा है.. जी हां..हमारी इसी मानसिकता के चलते उत्तरप्रदेश के नोएड़ा में एक सनसनीखेज वाकया सामने आया है. .जहां पिछले सात महीने से एक ही फ्लैट के भीतर दो बहने खुद को कैद करके रखती हैं.. लेकिन अगल-बगल वाले उनकी सुध नहीं लेते.  

मौत से जूझती जिंदगियां
हालांकि बाद में एक समाजसेवी संस्था की पहल पर पुलिस घर का दरवाज़ा तोड़कर इनकी सुध लेने पहुंचती तो है..लेकिन जब दरवाजा तोड़कर अंदर जाया जाता है..तो घर के अंदर का नज़ारा बेहद ही खौफनाक और दिल दहला देने वाला था..नज़ारा ऐसा था कि मानवता रो पड़े.. कमरे के अंदर से बदबू आ रही थी. एक बहन मरणासन्न हालत में सोफे पर पड़ी थी.. तो दूसरी की हालत भी काफी खराब थी..दरअसल सात महीने पहले इनके पिता जो कि सेना में एक कर्नल थे..कि मृत्यु हो गई थी..जिसके बाद इनके भाई के साथ भी इनका मनमुटाव हो गया..और वो भी इन्हें छोड़कर चला गया.. ये भी बताया जाता है कि दोनों बहनों ने भाई को पढ़ाने के लिए शादी भी नहीं की...भाई के घर छोड़कर चले जाने के बाद दोनों ही एकाकीपन का शिकार हो गईं..और खुद को कमरे में कैद कर लिया..फिलहाल बड़ी बहन की मौत हो चुकी है..और दूसरी मौत और जिंदगी के बीच झूल रही है...ये वाकया हमारे समाज को आइना दिखाने के लिए काफी है..धीरे-धीरे हमारे भीतर से इंसानियत का लोप होता जा रहा है...सभी लोग अपने दो रूम के फ्लैट में मस्त है..किसी को भी समाज और उसके भीतर रहने वालों के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं है..धीरे-धीरे समाज में एक-दूसरे के प्रति संवेदनाएं कम होती जा रही है..या फिर यूं कहें कि संवेदनाएँ मर सी गई हैं..तो शायद कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.. लेकिन क्या ये सही है कि हमारा समाज लोगों के प्रति संवेदनहीन हो जाए.. क्या हमारे भीतर अभी भी कोई नैतिकता नहीं बची हैं.. या वो भी सब पश्चिमी संस्कृति की ही भेंट चढ़ती जा रही है..क्या हम इतने खुदगर्ज हो गए हैं.. कि कोई शख्स हमारी आंखों के सामने परेशानी में हो...और हम अपनी आंखें मूंद कर आगे निकल जाए. हम भारतीय ऐसे तो न थे..फिर क्यों नोएडा का दिलदहलाने वाला वाकया हो गया..एक बार ज़रा ठहरकर इस बारे में सभी को सोचना होगा..क्योंकि जिस समाज में हम रहते हैं..जिस समाज का हम लोग एक अभिन्न अंग हैं...उस समाज के प्रति हमारे कुछ कर्तव्य भी है..अगली बार आप जब भी घर से निकले....और किसी शख्स को परेशानी में देखें तो एकबारगी ज़रूर सोचिएगा..उसके बारे में..मदद का हाथ बढ़ाने में कोई हर्ज भी नहीं है.. क्या पता हमारी छोटी सी पहल उसके लिए बहुत बड़ी मदद साबित हो.


Sunday, April 10, 2011



रालेगन का निराला संत..

अन्ना ने किया अनशन
झुक गई सरकार
उम्मीद जगी खत्म होगा अब भ्रष्टाचार
ये हैं जनता की हुंकार..


आमरण अनशन पर अन्ना हजारे
दो अप्रैल 2011 की रात को समूचा देश क्रिकेट विश्व कप के जीतने की खुशी में सड़कों पर जमकर जश्न मना रहा था..कभी न भूलने वाले इस दिन के जश्न की खुमारी अभी लोगों पर से पूरी तरह उतरी ही नहीं थी की एक बार फिर से लोग सड़कों पर उतर पड़े...लेकिन इस बार लोग जीत के जश्न के लिए नहीं बल्कि एक संघर्ष के लिए सड़कों पर उतरे थे.. न किसी प्रकार का शोर शराबा.. न किसी प्रकार की हिंसा.. चारों और नारे ही नारे सुनाई पड़ रहे थे.."अन्ना तुम आगे बढ़ो..हम तुम्हारे साथ हैं.. 

Monday, April 4, 2011

साकार हुआ सपना..


इस दुनिया के हम हैं सिकंदर
विश्व विजेता-2011     

सभी देशवासियों को क्रिकेट विश्व विजेता बनने पर हार्दिक बधाई..
खुशी ऐसी की रोके न रुके..
जीत का जूनून

ये टीम विश्व चैंपयन है.. 


Friday, April 1, 2011

121 करोड़ हुए हम..

भारत की जनसंख्या बीते एक दशक में 18.1 करोड़ बढ़कर अब 121 करोड़ यानी एक अरब 21 करोड़ हो गई है. जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पुरुषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ है.

इस बार की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है. यूपी की आबादी बीस करोड़ के लगभग है..जबकि महाराष्ट्र ग्यारह करोड़ तेईस लाख की आबादी के साथ दूसरे स्थान पर हैं..मजे की बात ये है कि अगर इन दोनों राज्यों की आबादी को जोड़ दिया जाए...तो इन दोनों की आबादी मिलकर अमेरिका की जनसंख्या से अधिक होगी. वैसे संतोष की बात ये है कि आबादी बढ़ने की हमारी रफ्तार कम हुई है और आजादी के बाद यह सबसे निचले स्तर पर है.