कहते हैं कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है. मानव जीवन के विकास के लिए बदलाव अति महत्वपूर्ण है. आज जो विद्यमान है..कल वो अतीत हो जाएगा..और उसकी जगह कोई और ले लेगा. यही बदलाव है.. जब तक पुराना जाएगा नहीं..नए के लिए स्थान नहीं बनेगा. एक उदाहरण देकर इस बात को समझाते हैं...कि पतझड़ के मौसम में जब पेड़ों से पीले पत्ते गिरते हैं..तो वे रास्ता बना रहे हैं.. बसंत ऋतु में आने वाले नए पत्तों के लिए..यानी उस डाल पर जो नई कोंपलें आएंगी.. वे निशानी है बदलाव की..
एक शाश्वत सत्य भी है कि जिसने जन्म लिया है..उसे जाना ही होगा..अर्थात वो जगह बनाएगा आने वाली पीढ़ियों के लिए. जब तक पुराना जाएगा नहीं.. तब तक नया अपना स्थान कैसे ग्रहण करेगा. सातवें दर्ज के बच्चे जब तक आठवें दर्जे में नहीं जाएँगे.. तब तक कैसे उन बच्चों के लिए जगह बनेगी..जो छठा दर्जा पास कर सातवें दर्जे में आने के लायक हो गए हैं.
सोच और विचार में भी वक्त के साथ बदलाव होता है.. हर शख्स की पसंदों में भी वक्त बदलाव लाता है. आप अपना ही उदाहरण लीजिए...कुछ सालों पहले जो चीज़ आपको बहुत पसंद हुआ करती थी.. हो सकता हैं.कि कुछ समय बाद आपको वो चीज़ पसंद नहीं रही हो. आपकी पसंद में बदलाव देखने को मिला हो.
वक्त के साथ लोगों के जीने का ढंग बदल रहा है.. वक्त ही बदलाव का अगुवा बनता है.. साफ है कि वक्त की सबसे बड़ी फितरत बदलाव है. हाल ही में हमने गणतंत्र के इकसठ साल पूरे किए हैं..पूरी दुनिया ने इस दौरान देश में हुए बदलावों को देखा है..छह दशक के भीतर देश के हर क्षेत्र में बदलाव देखने को मिला है. सामाजिक तानाबाना बदला है. आर्थिक हालात बदले हैं..गरीब-अमीर की परिभाषा में बदलाव देखने को मिला है. शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है..हमारे विदेशों के साथ संबंधों में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिला है..कभी जो मुल्क हमसे काफी दूर थे..वो आज हमसे गलबहियां करने को बेताब दिख रहे हैं..चाहे वो अमेरिका हो,रूस हो, फ्रांस हो,ब्रिटेन हो, चीन हो,जापान हो,दक्षिण कोरिया हो या फिर दुनिया के पटल पर कोई और देश. साल 2010 में दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत की यात्रा की..चीन के राष्ट्रपति हूं जिंताओं ने भी भारत का रुख किया. फ्रासं के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून भी भारत से अपनी दोस्ती और पक्की करने के लिए भारत आए. इस वक्त कई दशकों से भारत के सबसे अच्छे दोस्त की भूमिका निभाने वाले रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के भारत दौरे का जिक्र करना भी अहम है..एक और जहां विश्व पटल पर भारत की दमदार छवि का प्रतीक इन राजनेताओं का भारत दौरा है.. वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला जैसे कुछ अन्य घोटालों ने भारत की दमदार छवि को दागदार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. भ्रष्टाचार के अलावा नक्लवाद,आतंकवाद और महंगाई जैसे कई और मुद्दे हैं जो देश के सामने मुंह बाएं खड़े हैं.. अब वक्त आ गया है कि सभी देशवासी अपनी सोच में बदलाव लाएं..क्योंकि अगर देश को भ्रष्टाचार,आतंकवाद,नक्सलवाद और महंगाई जैसी अन्य समस्याओं से भी निज़ात दिलानी है..तो सोच में बदलाव के जरिए हम की सभी को देश तकदीर बदलनी है.. इससे देश की सूरत बदलेगी..और इसके लिए बदलाव ज़रूरी है..


परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। हमें समय के अनुसार बदलना चाहिए जो कि अस्तित्व को कायम रखने में सहायक सिद्ध होती हैं।
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