11 फरवरी 2011,,.ये वो दिन है जो मिस्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया. जी हां..यही वो दिन है जब 18 दिन के रक्तहीन गदर के बाद मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को जनांदोलन के आगे घुटने टेककर अपने पद से न केवल इस्तीफा देना पड़ा..बल्कि काहिरा स्थित राष्ट्रपति भवन छोड़ना पड़ा.
![]() |
| होस्नी मुबारक,पूर्व राष्ट्रपति,मिस्र |
18 दिन तक लगातार होस्नी के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोगों का तीव्र विरोध प्रदर्शन रंग लाया..मिस्र के इस आंदोलन ने दिखा दिया..कि जन सैलाब अगर ठान ले... तो कुछ भी कर सकता है. जनता ने केवल नारे लगाकर और झंडे दिखाकर अंहिसापूर्वक अपना विरोध जारी रखा.. और तीस साल से चले आ रहे होस्नी मुबारक के एकछ्त्र राज का खात्मा कर दिया. इस दौरान कुछ लोगों ने अपनी शहादत भी दी. होस्नी ने ग्यारह फरवरी को अपने पद से इस्तीफा देकर अपने सभी अधिकार सेना को सौंप दिए. और जैसे ही होस्नी के इस्तीफे की खबर का ऐलान उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान ने सरकारी टेलीविजन पर किया..कि सरकार विरोधी प्रदर्शन और बदलाव का केंद्र बने तहरीर चौक पर खुशी की लहर दौड़ गई... हजारों की तादाद में लोगनों ने अब मिस्र आज़ाद है के नारे लगाए..अंधेरा होने के बावजूद मिस्र में ऐतिहासिक बदलाव का केंद्र बना तहरीर चौक रौशनी से नहा उठा...सभी लोगों ने नाच-गाकर अपनी खुशी और जीत का इजहार किया. प्रदर्शनकारियों ने एक दूसरे को गले लगाकर अपनी जीत का जश्न मनाया..
![]() |
| रोशनी से नहाया हुआ तहरीर चौक |
![]() |
| होस्नी के जाने का जश्न मनाते मिस्रवासी |
दरअसल प्रदर्शकारियों ने होस्नी को चार फरवरी तक का वक्त अपना पद छोड़ने के लिए दिया था..लेकिन होस्नी ने उस मियाद के ठीक एक हफ्ते बाद यानी ग्यारह फऱवरी को अपनी रवानगी की मिस्र में अब सत्ता सैन्य परिषद् के हाथों में है..जिसने जनभावना के अनुरुप शासन करने का आश्वसान दिया है..होस्नी अब अरब देशों की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद पद छोड़ने वाले दूसरे नेता बन गए हैं. एक पखवाड़ा पहले ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति बेन अली भी जास्मिन क्रांति के तहत विरोध प्रदर्शन के बाद देश पलायन कर गलए थे. फिलहा, मिस्र की राजधानी काहिरा स्थित तहरीर चौक बदलाव का प्रतीक बन गया है..और अब तहरीर तवारीख बन गया है.



No comments:
Post a Comment