Saturday, February 12, 2011

कौन हैं होस्नी मुबारक



मिस्र में तीस साल तक एकछत्र राज करने वाले होस्नी मुबारक ने भारी जनदबाव के चलते ग्यारह फरवरी 2011 को अपना पद छोड़ दिया. मिस्र में तीस साल तक तानाशाही करने वाले होस्नी कौन है..क्या है उनका जीवन सफर आईए.. डालते हैं इस पर एक नज़र...



नाम-मोहम्मद होस्नी सैय्यद मुबारक
जन्म : 4 मई, 1928
पत्नी : सुजैन मुबारक
बेटे : अल्ला मुबारक व गमाल मुबारक


----------
- लड़ाकू विमान के पायलट होस्नी मुबारक 1972 में मिस्र की वायुसेना के कमांडर बने
- अप्रैल, 1975 में तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर अल सादात ने उपराष्ट्रपति नियुक्त किया
- 1981 में सादात की मौत के बाद देश की सत्ता संभाली
-----------
दो बार हुए हत्या के प्रयासों को मात दे चुके होस्नी मिस्र की जनता के गुस्से के कहर से खुद को नहीं बचा पाए.. होस्नी मुबारक का जन्म मैनोफिया के निले डेल्टा प्रांत में काफ्र अल मोसेल्हा के एक गांव में हुआ. वायुसेना में शामिल होने के साथ पद दर पद..रैंक दर रैंक..उनके अधिकारों मेंइजाफा हुआ..इज़रायल के साथ संघर्ष और रमदान युद्ध में 1973 में वे वे वायुसेना प्रमुख बने..और राष्ट्रपति अनवर सादत के विश्वास पर 1975 में उपराष्ट्रपति बने. छह साल बाद यानी छह अक्टूबर 1981 में एक सैन्य परेड के दौरान कट्टरपंथियों ने मंच पर आसीन नेताओँ पर गोलिया चलाकर राष्ट्रपति अनवर अल सादात की हत्या कर दी..मुबारक भी उस समय मंच पर सादात के बगल में दाहिनी ओर आसीन थे..लेकिन वे भाग्य शाली रहे ..और एक गोली मुबारक के बगल से सनसनाती हुई निकल गई..इसके एक सप्ताह बाद वे 14 अक्टूबर को मिस्र के राष्ट्रपति बन गए...बस यहीं से उनके राष्ट्रपति पद का सफर शुरू हुआ..जो तीस साल तक 2011 तक बिना किसी गतिरोध के चला..हालांकि बीच-बीच में उनके शासन का विरोध हुआ..लेकिन इसे उन्होंने अपनी चतुराई और सेना के बल पर कुचल दिया..1981 में सत्ता की बागडोर अपने हाथों में आते ही मुबारक ने संविधान में अपने मनमाफिक बदलाव कर ऐसे प्रावधान जोड़ दिए गए..जिससे उनकी सत्ता को कोई चुनौती न दे सके. यहां तक कि उन्होंने उपराष्ट्रपति पद पर भी किसी की नियुक्ति नहीं की..बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुबारक नियम और संयम के बिल्कुल पक्के इंसान हैं। उनकी दिनचर्या सुबह छह बजे से प्रारंभ होती है। उन्होंने अपने जीवन में न तो कभी सिगरेट पी और न ही कभी शराब को हाथ लगाया।
उन्होंने अपनी छवि बिल्कुल चुस्त और तंदुरुस्त इंसान वाली बना रखी है। इसलिए वह अपनी 82 वर्ष की उम्र से कहीं अधिक जवान दिखते हैं। कट्टरपंथियों ने उनकी दो बार जान लेने की कोशिश भी की..जून 1995 में वे ेक जिहादी हमले में बाल-बाल बचे. मिस्र में कभी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था उनकी प्राथमिकता में शुमार नहीं रही. लेकिन मिस्र की जनता ने उनके तीस साल पुराने शासन को रक्तहीन गदर के बल पर चुनौती दी..और मजबूरन उन्हें अपनी जान से भी प्यारी ग्ददी से हाथ धोना पड़ा.

No comments:

Post a Comment