कहते हैं कि वर्तमान पर अतीत की छाया ज़रूर रहती है. मतलब साफ है कि वर्तमान अतीत से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता..तभी तो साल 2011 के शुरुआती महीनों में ही घोटालों की आमद शुरु हो गई है..ये कुछ और नहीं बल्कि साल 2010 के आखिरी कुछ महीनों में सामने आए घोटालों का ही प्रभाव है..दरअसल, साल 2010 के गुजरते-गुजरते इतने घोटाले सामने आए कि इस साल को घोटालों का साल घोषित करने से कोई गुरेज नहीं किया जा सकता..साल 2010 जाते-जाते कॉमनवेल्थ घोटाला,टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला,सीवीसी पद पर थॉमस की नियुक्ति का मामला, आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला,बोफोर्स तोप घोटाला मामले में दलाली की खुली पोल जैसे कई घोटालों की टीस दे गया.
इतिहास में शायद ये पहली बार था कि इतनी बड़ी तादाद में एक के बाद एक घोटालों का खुलासा हुआ हो. फिलहाल इन सभी घोटालों की जांच जारी है..किसी घोटालें में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं..तो किसी घोटाले के चलते उक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था.. इतना ही नहीं एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ के टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने न केवल तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा का पद छीना बल्कि उनके सलाखों के पीछे पहुंचाने का भी इंतजाम कर दिया..फिलहाल राजा सीबीआई की गिरफ्त मे हैं..और उनके खिलाफ जांच जारी है. ऐसा भी पहली बार हुआ है किलोग भी सीबीआईन औ किसी घोटाले में केंद्रीय मंत्री के पद छोड़ते ही उसकी गिरफ्तारी हुई हो. राजा के अलावा तीन और लोग भी सीबीआई के शिकंजे में हैं..खैर साल 2010 में सामने आए इन घोटालों की जांच तो चलती रहेगी..और इनमें संलिप्त लोगों को कितनी सज़ा मिलती है..ये भी देखने वाली बात होगी..
इतिहास में शायद ये पहली बार था कि इतनी बड़ी तादाद में एक के बाद एक घोटालों का खुलासा हुआ हो. फिलहाल इन सभी घोटालों की जांच जारी है..किसी घोटालें में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं..तो किसी घोटाले के चलते उक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था.. इतना ही नहीं एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ के टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने न केवल तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा का पद छीना बल्कि उनके सलाखों के पीछे पहुंचाने का भी इंतजाम कर दिया..फिलहाल राजा सीबीआई की गिरफ्त मे हैं..और उनके खिलाफ जांच जारी है. ऐसा भी पहली बार हुआ है किलोग भी सीबीआईन औ किसी घोटाले में केंद्रीय मंत्री के पद छोड़ते ही उसकी गिरफ्तारी हुई हो. राजा के अलावा तीन और लोग भी सीबीआई के शिकंजे में हैं..खैर साल 2010 में सामने आए इन घोटालों की जांच तो चलती रहेगी..और इनमें संलिप्त लोगों को कितनी सज़ा मिलती है..ये भी देखने वाली बात होगी..
चलिए साल 2011 के अभी तक सामने आए सबसे बड़े घोटाले की करते हैं..ये है एस बैंड घोटाला..जिसमें केंद्र सरकार को दो लाख करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लगने का अनुमान है.. इस घोटाले को घोटालों के सरताज की संज्ञा दी जा रही है..
क्या है एस बैंड
एस बैंड घोटाले के बारे में जानने से पहले आपको बताते हैं कि आखिर ये एस बैंड है क्या बला...
न्यू यॉर्क के इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स (आईईईई) के मुताबिक एस बैंड उन रेडियो तरंगों को कहते हैं जिनकी फ्रीक्वेंसी दो से चार गीगा हर्ट्ज के बीच हो । एस बैंड का प्रयोग मौसम रडार, समुद्र तल पर मौजूद जहाज के रडार और सूचना के भेजने और पाने से संबंधित सैटेलाइटों में किया जाता है, खासतौर पर वे जो नासा द्वारा स्पेस शटल और अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं । इस १० सेमी रडार के सबसे छोटी बैंड की सीमा भी 1.55 से 5.2 गीगा हर्ट्ज तक की होती है।
क्या है एस बैंड घोटाला
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी इसरो पर दुर्लभ एस बैंड को बिना नीलामी की प्रक्रिया अपनाए एक निजी कंपनी को बेचने का आरोप है. इसरो पर आरोप है कि उसकी व्यवसायिक इकाई एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच साल 2005 में स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर 2० वर्ष का करार हुआ था. वहीं, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग ने इस करार से राजकोष को दो लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है. यह करार इसरो की ही एक शाखा एंट्रिक्स कार्पोरेशन लिमिटेड ने निजी कंपनी देवास मल्टिमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 600 करोड़ रुपए में किया गया। इस कंपनी को इस करार से जबर्दस्त लाभ हुआ। इस कंपनी के डायरेक्टर डा एमजी चंद्रशेखर हैं, जो पहले इसरो में ही वैज्ञानिक थे। 2010 में केंद्र सरकार को 3जी मोबाइल सर्विस के लिए केवल 15 मेगाहर्ट्ज की नीलामी पर 67,719 करोड़ रुपए मिले थे। इस डील के बाद देवास मल्टिमीडिया को ब्राडबैंड स्पेक्ट्रम के कुल 2500 मेगाहर्ट्ज बैंड में से 70 मेगाहर्ट्ज बैंड मिले। ये बैंड पहले दूरदर्शन के पास थे जो सैटेलाइट और इन 70 मेगाहर्ट्ज बैंड की मदद से देशभर में अपने कार्यक्रम प्रसारित करता था। वर्तमान में इनकी कीमत काफी ज्यादा है।
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