Wednesday, March 16, 2011


त्रासदी का दर्द..
सुनामी से त्रस्त जापान के लोग पांच दिन बाद भी अपनों की तलाश में दर बदर भटक रहे हैं..लोग शरणार्थी शिविरों में जाकर अपनों की तलाश कर रहे हैं..जिन्हें अपने सही-सलामत मिल रहे हैं..वे का भगवान शुक्रिया अदा कर रहे हैं..लेकिन कुछ बदनसीब ऐसे भी हैं..जिन्हें अपनों के केवल शव ही मिल रहे हैं..तो कुछ इतने बदनसीब है कि जिनके अपनों का कुछ भी अता-पता नहीं है..
सुनामी की महात्रासदी से पीड़ित लोगों का दर्द बयां करती कुछ तस्वीरें..
त्रासदी के पीड़ित

अपनों को खोने का ग़म
अपनों से मिलने की खुशी
जाको राखे साईंया,मार सके न कोई..मलबे से निकाली गई एक बच्ची
मदद के लिए दिल उठे हाथ

Friday, March 11, 2011


बेहिसाब तबाही..
 
जापान पर प्रकृति का कहर बरपा है.. जापान में जलजला आया..और जलजले के बाद उठी सुनामी की लहरों ने तबाही बरपाने में कोई कोताही नहीं बरती. कारें,ईमारतें,जहाज,पुल,बड़े-वाहन,हवाई जहाज..और जो कोई भी इन लहरों के रास्ते में आया...इन्होंने उसे भी अपने रास्ते से हटाने में कोई हिचकिचाहट नहीं की..लोग इमारतों में खड़े सहायता के लिए चीख-पुकार कर रहे थे..ज़लज़ला करीब ग्यारह मार्च को शुक्रवार के दिन स्थानीय समयानुसार दो बजकर पैंतालीस मिनट पर आया. ज़लज़ले की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8.9 आंकी गईं. इस भूकंप का केंद्र राजधानी टोक्यो से करीब चार सौ किलोमीटर दूर बीस मील की गहराई में था.
भूकंप का एपिक केंद्र
तबाही की लहरें,सुनामी


                 
एक ऑफिस के भीतर का नज़ारा
इमारतों की छतों पर फँसे लोग

भूकंप से टोक्‍यो में कई इमारतें हिल गईं और डर के मारे लोग घरों से बाहर आ गए. भूकंप के बाद आई बाढ़ से समुद्र तट से सटे मियागी प्रांत में कई इमारतें और कारें बह गईं. क्‍योडो न्‍यूज एजेंसी ने सेनदाई में ही समुद्र तट के समीप 200 से 300 लोगों के शव मिलने की खबर दी है।

उधर, मियागी प्रांत में ओनागावा न्‍यूक्लियर प्‍लांट की टरबाइन बिल्डिंग में आग लगने की खबर आई तो..एहतियातन अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भूकंप की जद में आए जापान के चार न्‍यूक्लियर पावर प्‍लांट सुरक्षित तरीके से बंद कर दिए गए.न्यूकलियर इमरजेंसी घोषित कर दी गई..सड़कें दरक गईं.. ज़लज़ले के चलते टोक्यो के आसपास के चालीस लाख घरों की बिजली आपूर्ति ठप है. टोक्‍यो के नज़दीक चिबा रिफायनरी में भीषण आग लगने की भी खबर है. जापान में चलने वाली बुलेट ट्रेन सेवा बंद कर दी गई है। भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के लिए 900 लोगों को काम पर लगाया गया है।
आप भी देखिए इस भयानक तबाही को तस्वीरों के ज़रिए..
जल में बह गया सब कुछ
जलमग्न हुआ सबकुछ
तेल रिफाइनरी में आग



नरीता एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है, विमानों को उड़ान भरने से रोक दिया गया, एयरपोर्ट से यात्रियों को निकाल लिया गया है. टोक्‍यो में मेट्रो ट्रेन सेवा बंद कर दी गई। उपनगरीय ट्रेन सेवा भी रोक दी गई है। जापान के उत्‍तरी तट पर स्थित सेनदाई एयरपोर्ट पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया है। जापान के सभी बंदरगाह बंद कर दिए गए हैं और यहां होने वाले कामकाज पूरी तरह बंद हैं। भूकंप से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सेना के आठ विमान काम में लगाए गए हैं।
जापान के इतिहास में 140 वर्षों के बाद ऐसा भीषण भूकंप आया है. । भूकंप के बाद सुनामी की 13 फीट ऊंची लहरों ने उत्‍तरी तट के समीप मियागी इलाके को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। मौसम विभाग की चेतावनी में कहा गया है कि सुनामी के दौरान समुद्र की 20 फीट ऊंची लहरें उठ सकती हैं। हवाई स्थित पैसिफिक सुनामी चेतावनी केंद्र ने जापान सहित इंडोनेशिया, हवाई द्वीप, ताइवान, रूस, मार्कस आइलैंड, उत्‍तरी मारियाना, गुआम और फिलीपींस के लिए भी जारी की गई है। हालांकि भारत के समुद्री तट महफूज हैं और यहां के लिए सूनामी की कोई चेतावनी नहीं जारी की गई है। पापुआ न्‍यू गिनी, ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड, फिजी, मैक्सिको, ग्‍वाटेमाला, अल साल्‍वाडोर, कोस्‍टा रिका, निकारागुआ, पनामा, होंडूरास, चिली, इक्‍वाडोर, कोलंबिया और पेरू में भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई है।
फिलहाल राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है..हालांकि लोगों की मौत का आंकड़ा अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है.

Wednesday, March 9, 2011

कितनी महफूज है दिल्ली...

आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन अपने घर से कॉलेज जाने के लिए निकली दिल्ली के नारायणा की राधिका तंवर ने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि ज्यों-ज्यों वो अपने कॉलेज की तरफ कदम आगे बढ़ा रही है..त्यों-त्यों उसकी मौत उसके और करीब आ रही है..दिनदहाड़े करीब सवा दस बजे एक अज्ञात युवक राधिका को गोली मारकर फरार हो गया..राधिका को तुरंत अस्पातल ले जाया गया..जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया..
राधिका तंवर


नहीं मिलेगी इच्छा की मृत्यु..

ये महिला पिछले सैंतीस सालों से यू हीं कराह रही है.. चिल्ला रही है.. कष्ट झेल रही है..और यूं ही बिस्तर पर अपनी जिंदगी का हर पल..  
अरुणा शानबाग
हर क्षण जहान्नुम के माफिक बिताने को मजबूर है.. और अब इसकी ज़िंदगी आगे भी यूं ही कटेगी..ये महिला है अरुणा शानबाग..

Tuesday, March 8, 2011

इच्छा की मृत्यु..



ये महिला पिछले सैंतीस सालों से यू हीं कराह रही है..
चिल्ला रही है.. कष्ट झेल रही है..और यूं ही बिस्तर पर अपनी जिंदगी का हर पल.. हर क्षण जहान्नुम के माफिक बिताने को मजबूर है.. और अब इसकी ज़िंदगी आगे भी यूं ही कटेगी..ये महिला है अरुणा शानबाग.. 

अगर सैंतीस साल पहले की बात करें तो ये है नर्स अरुणा शानबाग..जो केईएम अस्पताल में सेवारत थी.. 

फिर 27 नवंबर 1973 को अस्पताल के ही एक दरिंदे वार्डब्वॉय सोहनलाल वाल्मीकी की हैवानियत का वो शिकार हुई...और तभी से वो कोमा में हैं..और यूं ही इसी हालत में अपना जीवन जीने को मजबूर है..
वैसे अरुणा ने देश में यूथनेशिया यानी इच्छा मृत्यु के बेहद ही संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी है..दरअसल, अरुणा की एक पत्रकार मित्र पिंकी वीरानी ने अरुणा को इस तरह तिल-तिल कर जीने से मुक्ति दिलाने के मकसद से सुप्रीम कोर्ट में उसके लिए इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई थी...जिसे देश की आला अदालत ने ठुकरा दिया. गौरतलब है कि करीब 37 साल पहले अरुणा के साथ उनके अस्‍पताल के ही एक कर्मचारी ने उनके गले को कुत्ता बांधने वाली चेन से जकड़कर, उनके साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया था. उस वक्त अरुणा के दिमाग को ऑक्सीजन मिलना बंद हो गई थी..और तभी से उसके तंत्रिका तंत्र ने काम करना बंद कर दिया था.
वीरानी ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें मरने की इजाजत दी जानी चाहिए क्योंकि इज्जत से जीना सभी नागरिकों का मूल अधिकार है और शानबाग के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है. उन्होंने अदालत को यह भी कहा कि शानबाग इस स्थिति में नहीं हैं कि अपने बारे में वे कुछ सोचें.
गौरतलब है कि शानबाग के लिए मौत की इजाजत मांगने वाली याचिका दिसंबर  2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए मंजूर की थी। हालांकि तब भी तत्कालीन चीफ जस्टिस के. जी. बालकृष्णन, जस्टिस एके गांगुली और बीएस चौहान की बेंच ने कहा था कि भारतीय कानून के तहत हम किसी भी शख्स को मरने की इजाजत नहीं दे सकते।
07मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट के जज मार्केडेय काटजू और जस्टिस सुधा मिश्रा की खंडपीठ ने अरुणा के लिए इच्छा मृत्यु वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि देश में इस तरह का कोई कानून नहीं है..जो किसी भी शख्स को इस तरह मारने की इजाज़त देता हो..लेकिन कोर्ट ने ये कहा कि कुछ विशेष परिस्थितियों में पैसिव यूथनेशिया की इजाजत दी जा सकती है। अदालत ने पैसिव यूथनेशिया के लिए कुछ दिशानिर्देश भी तय किए...और कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही पहली बार देश में इच्‍छा मृत्‍यु के मामले में एक कानूनी दिशा भी तय हो गई. कोर्ट ने अपना सौ पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा कि कुछ असाध्य रोग से पीडि़त मरीजों के मामले में कानूनी तौर पर लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम हटाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि शानबाग के मामले में तथ्य, परिस्थिति, डॉक्टरों की राय आदि को ध्यान में रखकर यह इजाजत नहीं दी जा सकती। बेंच ने कहा कि वर्तमान में इच्छा मृत्यु के संबंध में कोई कानून मौजूद नहीं है, लेकिन कुछ मामलों के लिए कानून बनाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में पैसिव यूथनेशिया की इजाजत इसलिए नहीं दी जा रही है क्योंकि याचिकाकर्ता का शानबाग से खून का रिश्ता नहीं है और उन्हें अधिकार नहीं है कि वे उनके लिए मौत मांगें। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक संसद में इस बारे में कोई कानून नहीं बन जातातब तक सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान निर्णय लागू रहेगा.
वैसे अदालत का ये ऐतिहासिक फैसला देश में पहली बार 'पैसिव यूथनेशिया' का रास्‍ता साफ करने में मददगार साबित हो सकता है.
आखिर ये यूथनेशिया है क्या..
यूथनेशिया का शाब्दिक अर्थ होता है इच्छामृत्यु या दयामृत्यु. अर्थात जीवन को खत्म किया जाने का ऐसा तरीका जिससे उस शख्स को दर्द और दिक्कतों से निजात मिल सके. यूथनेशिया में संबंधित शख्स की मर्जी से या उसकी बिना मर्जी से जीवन खत्म किया जा सकता है.
इच्छामृत्यु या दयामृत्यु देने के कई तरीके हैं, जो विदेशों में अपनाए जा रहे हैं। वैसे कई देशों में इच्छा मृत्यु को कानूनी मान्यता प्राप्त है.

एक्टिव यूथनेशिया:-इसमें मरीज को जहर आदि का इंजेक्शन लगाकर सीधे तौर पर मार दिया जाता है।

यूथनेशिया बाई ओमीशन:- इसके तहत मरीज को दी जा रही जीवन रक्षक सुविधा हटा ली जाती है और सब कुछ प्रकृति पर छोड़ दिया जाता है।

पैसिव यूथनेशिया -इसमें जीवन रक्षक प्रणाली यानी लाइफ सपोर्ट सिस्टम, दवाएं और इलाज रोकना, भोजन और पानी की आपूर्ति रोकना, हृदय और सांस के लिए मदद रोकने जैसी चीजें शामिल हैं।

फिजिशियन असिस्टेड यूथनेशिया:- इसमें डॉक्टर मरीज को आत्महत्या करने के तरीके मसलन दवाओं के डोज, इंजेक्शन आदि की जानकारी देता है। इसके तहत नींद की गोलियां खाकर, कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस के जरिए आत्महत्या किए जाने की सलाह डॉक्टर देते हैं।  

वॉलंटरी यूथनेशिया: इसमें मरीज की इच्छा के तहत उसे मारा जाता है।

नॉन वॉलंटरी यूथनेशिया: इसमें मरीज न तो मरने की इच्छा जाहिर करता है और न ही इसके लिए सहमति देता है। इसे कुछ नैतिकतावादी हत्या भी मानते हैं।  

इनवॉलंटरी यूथनेशिया:- इसमें मरने वाला मौत से पहले न मरने की इच्छा जाहिर करता है।

Sunday, March 6, 2011

पीएम को पत्र

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
नमस्कार प्रधानमंत्री महोदय,

देश में कोई भी सरकार सत्ता में आए,,वो बात करती है मेरे विकास की.. वादा करती है मेरी तरक्की का.. मेरे विकास का..आश्वासन देती है मेरी आने वाली पीढियों की बेहतर शिक्षा और नौकरी का.. नीतियां बनाती हैं मेरे विकास के नाम पर.. मेरे विकास की योजनाओँ के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी करती है.. करोड़ो रुपया खर्च भी करती है उन योजनाओँ पर जिन्हें मेरे समग्र विकास के लिए बनाई गई हैं. हमारे देश को आज़ाद हुए छह दशक से भी ऊपर का समय हो गया है.. इस दौरान कई सरकारें मेरे समुचित विकास के वादे के साथ सत्ता में आईं..और गईं.. योजनाएँ बनीं..नीतियां बनीं..लागू भी हुईं..पंचवर्षीय योजनाएँ बनीं...लागू भी हुईँ..मेरे विकास के लिए अरबों-ख़रबों इस दौरान खर्च भी किए गए..अरबों-खरबों रुपया मेरे विकास के नाम पर खर्च हुआ..जो भी सरकार सत्ता में रही उसने ही मेरी तरक्की और विकास का दंभ भरा.. 

सामने आएगा बोफोर्स का सच..?


वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा..

कुछ यहीं अंदाज था चार मार्च 2011 को दिल्ली की तीस हजारी अदालत के चीफ मेट्रोपोलिटन जज विनोद यादव का ..जिन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म के इस गाने की ये लाइन कहने के बाद बोफोर्स तोप सौदा दलाली मामले में बहत्तर पन्नों का फैसला सुनाया..और इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्ववात्रोच्चि के खिलाफ केस बंद करने की सीबीआई की अर्जी स्वीकार कर ली
ओत्तावियो क्वात्रोच्चि

 सीएमएम विनोद यादव ने कहा कि जांच में आम आदमी की गाढ़ी कमाई के ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद सीबीआई आरोपी को भारत लाने में कामयाब नहीं हो पाई.. 

हां मेरी ग़लती है..


इंसान ग़लतियों का पुतला है..और कहते भी है न कि ग़लती तो इंसान से ही होती है..फिर चाहे वो कितना ही महान क्यों न हो..जी हां...प्रधानमंत्री जैसे जिम्मेदार ओहदे को संभालने वाले लोग भी ग़लती कर सकते हैं..और वे उसे स्वीकार करते भी हैं.. हां भई मैं बात कर रहा हूं..अपने अर्थशास्र्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की...दागी सीवीसी पी जे थॉमस की पद पर नियुक्ति में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरकार अपनी ग़लती मान ही ली.
मनमोहन सिंह,भारत के प्रधानमंत्री

पांच मार्च को जम्मू में संवाददाताओँ से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे सीवीसी की नियुक्ति में अपनी जवाबदेही स्वीकार करते हैं..और एक आम नागरिक की भांति सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं..

Wednesday, March 2, 2011

क्या सरकार सुन रही है..



सोमालियाई समुद्री लुटरों के चंगुल में फंसे छह भारतीय नाविकों में से दो नाविकों के परिजन उनकी रिहाई की गुहार के लिए संबंधित मंत्रालयों की चौखट पर गुहार लगा रहे हैं...हालांकि विदेश मंत्री के आश्वासन से उनकी रिहाई की उम्मीद तो जगी है..लेकिन अभी उनका इंतजार और लंबा भी हो सकता है. दरअसल, सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने दो अगस्त 2010 को मिस्र के एमवी स्वेज जहाज और चालक दल के 22 सदस्यों को अदन की खाड़ी से अगवा कर लिया था. लुटेरे उनकी मुक्ति के लिए 40 लाख अमेरिकी डॉलर की मांग रहे हैं..उधर, इस जहाज के मिस्री मालिक ने फिरौती की रकम देने से इनकार कर दिया है.. सोमालियाई लुटेरों द्वारा बंधक इन बाईस नाविकों में छह भारतीय,ग्यारह मिस्र के,चार पाकिस्तानी और एक नाविक श्रीलंकाई मूल का है.. लुटेरों से उनकी मुक्ति के लिए बातचीत कर रहे वार्ताकारों के अनुसार सभी बंधक बेहद अमानवीय हालात में हैं। उन्हें सिर्फ उबला चावल और मछली खाने को दिया जा रहा है ।
लुटेरों के चंगुल में फंसे दो बंधकों के परिजनों को दस दिनों तक चक्कर काटने के बाद विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने रिहाई के बाबत कुछ कदम उठाने का आश्वसान ज़रूर दिया है. बंधक बनाए गए एक नाविक रविंदर आर्य की पत्नी संपा आर्य और दूसरे नाविक एन के शर्मा के भाई कुशल खजूरिया ने विदेश मंत्री से मुलाकात की.. 

संपा आर्य,बंधक नाविक रविंदर आर्य की पत्नी


कुशल खजूरिया,बंधक नाविक एनके शर्मा के भाई

वैसे एक बात बता दूं कि विदेश मंत्री ने इन दोनों को बड़ी आसानी से मिलने का समय नहीं दिया था. पहले तो दोनों ने विदेश मंत्री से एक अदद मुलाकात के लिए विदेश मंत्रालय के खूब चक्कर लगाए..लेकिन जब वहां इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई..तब एक निजी अंग्रेजी चैनल पर इन दोनों ने अपना दुखड़ा रोया..तो शायद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की नींद खुली.. और दोनों को विदेश मंत्री ने मिलने का समय दिया और मिले भी..लेकिन मिलने के बाद एक मंझे हुए राजनेता की भांति उन्होंने दोनों परिवारों को आश्वसान देकर उन्हें जहाजरानी मंत्री जी के वासन से मुलाकात की सलाह दी..क्योंकि उनके मुताबिक इस मुद्दे में जहाजरानी मंत्रालय ही कोई ठोस कदम उठा सकता है.
एस एम कृष्णा,भारतीय विदेशमंत्री

.खैर विदेश मंत्री से तो मीडिया में आने के बाद मुलाकात हो गई.. अब देखना होगा कि जहाजरानी मंत्री से मिलने में दोनों को कितना समय लगता है.
वैसे ये मुद्दा कोई दो-चार दिन पुराना नहीं है..पूरे सात महीने हो गए..सोमालियाई लुटरों को उस जहाज को अगवा किए हुए.. हैरानी की बात है कि सरकार ने अपने नागरिकों की सकुशल रिहाई के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया..संपा आर्य और खजूरिया ने निजी चैनल के ज़रिए सरकार से सभी नाविकों की सकुशल रिहाई की गुहार लगाई है..
वैसे सवाल यहां कई उठते हैं ..
-मीडिया में इस मुद्दे के आने के बाद ही दोनों परिजनों की क्यों सुनी गईं..क्या सरकार को इतनी बड़ी घटना की कोई जानकारी नहीं थी.
-क्या सरकार सोमालियाई लुटेरों द्वारा किसी भारतीय नाविक के मारे जाने का इंतजार कर रही है.
-क्या सरकार की अपने नागरिकों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है..शर्म आनी चाहिए इस सरकार को..जिसके नागरिक लुटरों के चंगुल में तिल-तिल कर जीने को मजबूर हैं..और ये हाथ पर हाथ धरे बैठी है.
- अगर जहाज का मालिक फिरौती देने से इनकार रहा है तो क्या सरकार हमारे अपने लोगों को वहां मरने के लिए छोड़ सकती है.
-अगर क्या किसी बड़े राजनेता या केंद्रीय मंत्री का रिश्तेदार उन नाविकों में होता तो भी क्या सरकार का यही रवैया रहता.
  • क्या संपा के रूंधे हुए गले की आवाज़ सरकार तक पहुंच रही है...