Friday, April 1, 2011

121 करोड़ हुए हम..

भारत की जनसंख्या बीते एक दशक में 18.1 करोड़ बढ़कर अब 121 करोड़ यानी एक अरब 21 करोड़ हो गई है. जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पुरुषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ है.

इस बार की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है. यूपी की आबादी बीस करोड़ के लगभग है..जबकि महाराष्ट्र ग्यारह करोड़ तेईस लाख की आबादी के साथ दूसरे स्थान पर हैं..मजे की बात ये है कि अगर इन दोनों राज्यों की आबादी को जोड़ दिया जाए...तो इन दोनों की आबादी मिलकर अमेरिका की जनसंख्या से अधिक होगी. वैसे संतोष की बात ये है कि आबादी बढ़ने की हमारी रफ्तार कम हुई है और आजादी के बाद यह सबसे निचले स्तर पर है.
पिछली जनगणना के मुकाबले जनसंख्या दर करीब चार फीसदी कम दर्ज की गई है. इसी तरह महिलाओं की तत्परता के कारण अब हमारी कुल 74 फीसदी आबादी साक्षर हो चुकी है। 
लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इस दौरान गर्भ में बच्चियों की हत्या के मामले में हमने सारे रिकार्ड तोड़ दिए. छह साल तक की आबादी में इस समय एक हजार लड़कों के मुकाबले सिर्फ 914 लड़कियां ही हैं. केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लऔर भारत के महापंजीयक सी. चंद्रमौलि ने गुरुवार(31 मार्च 2011) को नई दिल्ली में जनगणना 2011 के आंकड़े पेश किए. जनगणना 2011 (प्रोविजनल) के अनुसार मुताबिक पिछले दस साल के दौरान हमने दुनिया के पांचवें सबसे ज्यादा आबादी वाले देश ब्राजील जितनी आबादी पैदा कर दी. आज़ादी के बाद से यह सबसे कम वृद्धि दर वाला दशक साबित हुआ है.  
कुल संख्या के हिसाब से देखें तो 2001 से 2011 के दौरान जितनी आबादी बढ़ी वह उससे एक दशक पहले हुई बढ़ोतरी से कम ही है. बीस करोड़ की आबादी के साथ उत्तर प्रदेश पहले,11.23 करोड़ के साथ महाराष्ट्र दूसरे और 10.38 करोड़ के साथ बिहार तीसरे नंबर पर है..वहीं, सबसे कम आबादी लक्षद्वीप की है..यहां की आबादी मात्र 64,429 ही है. वैसे एक बात और बता दें कि अकेले उत्तरप्रदेश की जनसंख्या दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश ब्राजील की आबादी के बराबर है.
ताजा जनगणना के मुताबिक प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का औसत पहले के 933 के मुकाबले बढ़ कर 940 हो गया है. सिर्फ बिहार, गुजरात और जम्मू-कश्मीर ही ऐसे तीन राज्य रहे, जिनमें महिलाओं का औसत कम हुआ है. ताजा आंकड़े साबित करते हैं कि लड़कियों को गर्भ में ही या पैदा होते ही मार देने की घटनाएं बढ़ी हैं. छह साल तक की आबादी में बच्चियों का औसत पिछली जनगणना के 927 से भी घट कर 914 हो गया है. छह साल तक की आबादी में लड़कियों के औसत के मामले में हरियाणा और पंजाब 830 और 846 के औसत के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं.
जनगणना 2011 के ताजा आंकड़ें साक्षरता के मामले में बड़ी ही सुकुन देने वाले हैं..इनके मुताबिक देश में सात साल से ऊपर की आबादी में 74 फीसदी लोग अब साक्षर हो चुके हैं..जबकि 2001 में हुई जनगणना के दौरान देश भर में सिर्फ 64.83 फीसदी लोग ही साक्षर पाए गए थे. पिछले कुछ सालों से विकास दर के मामले में अव्वल बिहार साक्षरता के मामले में फिसडडी साबित हुआ है..यहां साक्षरता दर 63.82 है..बिहार के अलावा अरुणाचल प्रदेश भी 66.95 फीसदी साक्षरता दर के साथ निचले पायदान पर है....जबकि 93.91 फीसदी के साथ केरल अव्वल है. तेजी से साक्षर बनने के मामले में महिलाओं ने पुरुषों से बाजी मारी है. जहां पुरुषों में साक्षरता दर 6.88 फीसदी ही बढ़ी, वहीं महिलाओं में यह 11.79 फीसदी की दर से बढ़ी.
वैसे इस बार की जनगणना में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह देखने को मिला कि 1971 के बाद देश में पहली बार पुरुष और महिला कीककी की की अनुपात दर बढ़ी है. 2001 में जो राष्ट्रीय अनुपात 933 था..वो इस बार बढ़कर 940 हो गया है. लेकिन बिहार, गुजरात और जम्मू-कश्मीर मात्र तीन ऐसे राज्य हैं जहां सेक्स रेशियो कम हुआ है. बिहार में यह 919 से घटकर 916 हो गया है जबकि झारखंड जैसे राज्य में भी यह 941 से बढ़कर 947 हो गया है.
जनगणना 2011 पर कुल 2200 करोड़ रुपये का खर्च हुआ है.जी हां,, घर-घर जाकर देश के हर नागरिक को जनगणना में शामिल करने की कवायद पर 2200 करोड़ रुपये खर्च हुए. इस जनगणना कार्यक्रम में करीब 27 लाख कर्मचारी लगाए गए थे. 15वीं जनगणना का यह कार्यक्रम दो चरण में पूरा किया गया. पहला चरण अप्रैल से सितंबर, 2010 और दूसरा चरण 9 से 29 फरवरी, 2011 के बीच संपन्न हुआ. भारत के महापंजीयक व जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली ने गुरुवार को जनगणना के आंकड़े जारी करते इसके खर्च की जानकारी दी. नगणना में देश के 28 राज्यों व 07 केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 640 जिलों को शामिल किया गया था.

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