सोमालियाई समुद्री लुटरों के चंगुल में फंसे छह भारतीय नाविकों में से दो नाविकों के परिजन उनकी रिहाई की गुहार के लिए संबंधित मंत्रालयों की चौखट पर गुहार लगा रहे हैं...हालांकि विदेश मंत्री के आश्वासन से उनकी रिहाई की उम्मीद तो जगी है..लेकिन अभी उनका इंतजार और लंबा भी हो सकता है. दरअसल, सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने दो अगस्त 2010 को मिस्र के एमवी स्वेज जहाज और चालक दल के 22 सदस्यों को अदन की खाड़ी से अगवा कर लिया था. लुटेरे उनकी मुक्ति के लिए 40 लाख अमेरिकी डॉलर की मांग रहे हैं..उधर, इस जहाज के मिस्री मालिक ने फिरौती की रकम देने से इनकार कर दिया है.. सोमालियाई लुटेरों द्वारा बंधक इन बाईस नाविकों में छह भारतीय,ग्यारह मिस्र के,चार पाकिस्तानी और एक नाविक श्रीलंकाई मूल का है.. लुटेरों से उनकी मुक्ति के लिए बातचीत कर रहे वार्ताकारों के अनुसार सभी बंधक बेहद अमानवीय हालात में हैं। उन्हें सिर्फ उबला चावल और मछली खाने को दिया जा रहा है ।
लुटेरों के चंगुल में फंसे दो बंधकों के परिजनों को दस दिनों तक चक्कर काटने के बाद विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने रिहाई के बाबत कुछ कदम उठाने का आश्वसान ज़रूर दिया है. बंधक बनाए गए एक नाविक रविंदर आर्य की पत्नी संपा आर्य और दूसरे नाविक एन के शर्मा के भाई कुशल खजूरिया ने विदेश मंत्री से मुलाकात की..
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| संपा आर्य,बंधक नाविक रविंदर आर्य की पत्नी |
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| कुशल खजूरिया,बंधक नाविक एनके शर्मा के भाई |
वैसे एक बात बता दूं कि विदेश मंत्री ने इन दोनों को बड़ी आसानी से मिलने का समय नहीं दिया था. पहले तो दोनों ने विदेश मंत्री से एक अदद मुलाकात के लिए विदेश मंत्रालय के खूब चक्कर लगाए..लेकिन जब वहां इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई..तब एक निजी अंग्रेजी चैनल पर इन दोनों ने अपना दुखड़ा रोया..तो शायद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की नींद खुली.. और दोनों को विदेश मंत्री ने मिलने का समय दिया और मिले भी..लेकिन मिलने के बाद एक मंझे हुए राजनेता की भांति उन्होंने दोनों परिवारों को आश्वसान देकर उन्हें जहाजरानी मंत्री जी के वासन से मुलाकात की सलाह दी..क्योंकि उनके मुताबिक इस मुद्दे में जहाजरानी मंत्रालय ही कोई ठोस कदम उठा सकता है.
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| एस एम कृष्णा,भारतीय विदेशमंत्री |
.खैर विदेश मंत्री से तो मीडिया में आने के बाद मुलाकात हो गई.. अब देखना होगा कि जहाजरानी मंत्री से मिलने में दोनों को कितना समय लगता है.
वैसे ये मुद्दा कोई दो-चार दिन पुराना नहीं है..पूरे सात महीने हो गए..सोमालियाई लुटरों को उस जहाज को अगवा किए हुए.. हैरानी की बात है कि सरकार ने अपने नागरिकों की सकुशल रिहाई के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया..संपा आर्य और खजूरिया ने निजी चैनल के ज़रिए सरकार से सभी नाविकों की सकुशल रिहाई की गुहार लगाई है..
वैसे सवाल यहां कई उठते हैं ..
-मीडिया में इस मुद्दे के आने के बाद ही दोनों परिजनों की क्यों सुनी गईं..क्या सरकार को इतनी बड़ी घटना की कोई जानकारी नहीं थी.
-क्या सरकार सोमालियाई लुटेरों द्वारा किसी भारतीय नाविक के मारे जाने का इंतजार कर रही है.
-क्या सरकार की अपने नागरिकों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है..शर्म आनी चाहिए इस सरकार को..जिसके नागरिक लुटरों के चंगुल में तिल-तिल कर जीने को मजबूर हैं..और ये हाथ पर हाथ धरे बैठी है.
- अगर जहाज का मालिक फिरौती देने से इनकार रहा है तो क्या सरकार हमारे अपने लोगों को वहां मरने के लिए छोड़ सकती है.
-अगर क्या किसी बड़े राजनेता या केंद्रीय मंत्री का रिश्तेदार उन नाविकों में होता तो भी क्या सरकार का यही रवैया रहता.
- क्या संपा के रूंधे हुए गले की आवाज़ सरकार तक पहुंच रही है...



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