Sunday, March 6, 2011

हां मेरी ग़लती है..


इंसान ग़लतियों का पुतला है..और कहते भी है न कि ग़लती तो इंसान से ही होती है..फिर चाहे वो कितना ही महान क्यों न हो..जी हां...प्रधानमंत्री जैसे जिम्मेदार ओहदे को संभालने वाले लोग भी ग़लती कर सकते हैं..और वे उसे स्वीकार करते भी हैं.. हां भई मैं बात कर रहा हूं..अपने अर्थशास्र्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की...दागी सीवीसी पी जे थॉमस की पद पर नियुक्ति में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरकार अपनी ग़लती मान ही ली.
मनमोहन सिंह,भारत के प्रधानमंत्री

पांच मार्च को जम्मू में संवाददाताओँ से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे सीवीसी की नियुक्ति में अपनी जवाबदेही स्वीकार करते हैं..और एक आम नागरिक की भांति सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं..
गौरतलब है कि तीन मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पी जे थॉमस की सीवीसी पद पर नियुक्ति को अवैध करार दिया था.  
पीजे थॉमस,केंद्रीय सतर्कता आयुक्त

दरअसल ,पीएम ने ग़लती मानी है..क्योंकि थॉमस को सीवीसी बनाने वाली तीन सदस्यीय समिति के अध्यक्ष वही थे..समिति के अन्य दो सदस्यों पी चिदंबरम ने उनका समर्थन किया था..जबकि अन्य सदस्य लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने थॉमस की सीवीसी के पद पर नियुक्ति का विरोध किया था..क्योंकि थॉमस पर केरल के पामोलिन घोटाले में शामिल रहने का आरोप था. अब कुछ पार्टियों ने प्रधानमंत्री से इस बाबत सदन में जवाब देने को कहा है...हालांकि प्रधानमंत्री सदन की गरिमा का ख्याल रखते हुए सदन में जवाब देंगे भी.
मगर सवाल उठता है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लताड़ लगाने के बाद ही पीएम को अपनी ग़लती का अहसास क्यों हुआ..क्या सरकार के मुखिया होने के नाते उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती कि ऐसे महत्वपूर्ण पद पर किसी शख्स की नियुक्ति करते वक्त वे सभी आयामों को ध्यान में रखते..साथ ही सुषमा की आपत्ति को भी उन्हें दरकिनार नहीं करना चाहिए था. अहम सवाल ये भी है कि क्या पीएम पर थॉमस की नियुक्ति के लिए किसी प्रकार का दबाव था. क्या उन पर गठबंधन धर्म निभाने जैसी कोई मजबूरी थी..जैसा कि वे ए राजा को दूरसंचार मंत्री के तौर पर नियुक्ति के संबंध में टीवी चैनलों के संपादकों के साथ उनकी मुलाकात के दौरान स्वीकार कर चुके हैं. केरल में हुए पामोलिन घोटाले के आरोपी थ़ॉमस के बारे में हर कोई जानता है..फिर क्यों प्रधानमंत्री ने आंख बंदकर फैसला लिया.
दरअसल, विपक्ष द्वारा हमेशा निशाने पर रहने वाले पीएम द्वारा इस मामले में अपनी ग़लती स्वीकार करना उनकी ईमानदार छवि को दर्शाता है..लेकिन साथ ही ये भी साफ कर देता है कि वे किस कदर आदेश कहीं और से ही पाते हैं. लेकिन पीएम द्वारा गलती मान लेना ही काफी नहीं है..उनसे उम्मीद की जाती है वे देश की जनता के विश्वास पर खरे उतरे..क्योंकि हर बार ग़लती कर उसे मान लेना ही काफी नहीं है..फिर वो चाहे राजा को दूरसंचार मंत्री पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार करने की खुली छुट देना..या फिर अनपी प्रत्य़क्ष जिम्मेदारी वाली समिति के ज़रिए सीवीसी पद पर थॉमस जैसे दागी शख्स की नियुक्ति. देशवासी उम्मीद करते हैं कि पीएम भविष्य में ऐसी ग़लतियों के दोहराव से बचने की हर संभव कोशिश करेंगे..ताकि जनता का उनमें विश्वास और दृढ़ हो सके.

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