वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा..
कुछ यहीं अंदाज था चार मार्च 2011 को दिल्ली की तीस हजारी अदालत के चीफ मेट्रोपोलिटन जज विनोद यादव का ..जिन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म के इस गाने की ये लाइन कहने के बाद बोफोर्स तोप सौदा दलाली मामले में बहत्तर पन्नों का फैसला सुनाया..और इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्ववात्रोच्चि के खिलाफ केस बंद करने की सीबीआई की अर्जी स्वीकार कर ली.
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| ओत्तावियो क्वात्रोच्चि |
सीएमएम विनोद यादव ने कहा कि जांच में आम आदमी की गाढ़ी कमाई के ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद सीबीआई आरोपी को भारत लाने में कामयाब नहीं हो पाई..
दरअसल, केस को बंद करने के पीछे कहा गया कि इस केस में पच्चीस सालों के बाद भी कुछ और जांच की गुजांइश नहीं है..और इसमें अब कुछ भी नया निकलकर नहीं आने वाला है..इसलिये जनता के हित में इसे बंद करने में ही भलाई है..यानी कोर्ट के फैसले के बाद अब बोफोर्स केस की फाइल बंद हो जाएगी. दरअसल क्ववात्रोच्चि पर बोर्स तोप सौदा मामले में दलाली खाने का आरोप है. इस मामले में चौसठ करोड़ की दलाली खाने के आरोप थे.
दरअसल, केस को बंद करने के पीछे कहा गया कि इस केस में पच्चीस सालों के बाद भी कुछ और जांच की गुजांइश नहीं है..और इसमें अब कुछ भी नया निकलकर नहीं आने वाला है..इसलिये जनता के हित में इसे बंद करने में ही भलाई है..यानी कोर्ट के फैसले के बाद अब बोफोर्स केस की फाइल बंद हो जाएगी. दरअसल क्ववात्रोच्चि पर बोर्स तोप सौदा मामले में दलाली खाने का आरोप है. इस मामले में चौसठ करोड़ की दलाली खाने के आरोप थे.
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| बोफोर्स तोप |
सीबीई ने उसके खिळाफ पहला मामला जनवरी 1990 में दर्ज किया था..और अक्टूबर 1999 में और फिर अक्टूबर 2000 में उसके खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल की गई थीं. इसके बाद सीबीआई ने अक्टूबर 2009 में इस मामले को वापस लेने की अनुमति मांगते हुए कहा था कि कई कारणों को ध्यान में रखते हुए क्वात्रोच्चि पर कई सालों से चल रहा ये केस न्यायोचित नहीं है. आपको ये भी बता दूं कि हमारी जांच एजेंसी सीबीई दो बार क्वात्रोच्चि के भारत प्रत्यर्पण में नाकाम रही..सीबीआई 2003 में मलेशिया से और 2007 में अर्जेंटीना से उसे प्रत्यर्पित करने की दो नाकाम कोशिशें कर चुकी है. अब इस केस में ओत्तावियो क्ववात्रोच्चि साफ बच निकला है.
सवाल उठता है कि करीब पच्चीस सालों तक जांच करने के बाद देश की केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपने हाथ क्यों खड़े कर दिए.. जनता के टैक्स के पैसे के 250 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाकर भी क्यों नहीं क्ववात्रोच्चि पर आरोप साबित कर पाई सीबीआई. पच्चीस साल में 250 करोड़ खर्च करने के बाद भी जांच वहीं की वहीं..तो फिर आखिर क्यों चली इतने साल जांच.
वैसे एक बात ये भी समझ में नहीं आ रही है कि जब आयकर विभाग के न्यायाधिकरण यानी ट्राइब्यूनल को इस मामले में तथ्य और सुबूत मिल सकते हैं..तो देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को सबूत कैसे नहीं मिलें...आपको याद तो होगा कि कुछ दिन पहले ट्राइब्यूनल ने ये बात स्वीकार की थी..कि बोफोर्स तोप सौदे में दलाली दी गई थी. क्या सीबीआई द्वारा इस मामले की जांच सिर्फ देश की भोली भाली जनता को दिखाने के लिए ही थी कि बोफोर्स मामले की जांच चल रही है..चलिए बोफोर्स केस इसके बाद भले ही बंद हो जाए.. लेकिन बड़ा सवाल पच्चीस साल में 64 करोड़ की दलाली के मामले की जांच में 250 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद भी बोफोर्स का सच जनता के सामने क्यों नहीं आया.
वैसे शायद अब कभी ये सच जनता के सामने आ भी नहीं पाएगा..शायद शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा हूं कि इस मामले में याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल तीस हजारी कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट हैं..और उच्च अदालत में अपील का मन बना रहे हैं..लेकिन सवाल वही का वही.. जब पच्चीस साल में इस केस का कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा.. कहीं और पच्चीस साल का इंतजार तो नहीं...
वैसे एक बात ये भी समझ में नहीं आ रही है कि जब आयकर विभाग के न्यायाधिकरण यानी ट्राइब्यूनल को इस मामले में तथ्य और सुबूत मिल सकते हैं..तो देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को सबूत कैसे नहीं मिलें...आपको याद तो होगा कि कुछ दिन पहले ट्राइब्यूनल ने ये बात स्वीकार की थी..कि बोफोर्स तोप सौदे में दलाली दी गई थी. क्या सीबीआई द्वारा इस मामले की जांच सिर्फ देश की भोली भाली जनता को दिखाने के लिए ही थी कि बोफोर्स मामले की जांच चल रही है..चलिए बोफोर्स केस इसके बाद भले ही बंद हो जाए.. लेकिन बड़ा सवाल पच्चीस साल में 64 करोड़ की दलाली के मामले की जांच में 250 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद भी बोफोर्स का सच जनता के सामने क्यों नहीं आया.
वैसे शायद अब कभी ये सच जनता के सामने आ भी नहीं पाएगा..शायद शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा हूं कि इस मामले में याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल तीस हजारी कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट हैं..और उच्च अदालत में अपील का मन बना रहे हैं..लेकिन सवाल वही का वही.. जब पच्चीस साल में इस केस का कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा.. कहीं और पच्चीस साल का इंतजार तो नहीं...


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