कितनी महफूज है दिल्ली...
दरअसल, राधिका तंवर दिल्ली के रामलाल आनंद कॉलेज की छात्रा थी..वो जब कॉलेज जा रही थी तभी हत्यारे ने दिनदहाड़े उसे गोली मार दी.
आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन अपने घर से कॉलेज जाने के लिए निकली दिल्ली के नारायणा की राधिका तंवर ने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि ज्यों-ज्यों वो अपने कॉलेज की तरफ कदम आगे बढ़ा रही है..त्यों-त्यों उसकी मौत उसके और करीब आ रही है..दिनदहाड़े करीब सवा दस बजे एक अज्ञात युवक राधिका को गोली मारकर फरार हो गया..राधिका को तुरंत अस्पातल ले जाया गया..जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया..
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| राधिका तंवर |
दरअसल, राधिका तंवर दिल्ली के रामलाल आनंद कॉलेज की छात्रा थी..वो जब कॉलेज जा रही थी तभी हत्यारे ने दिनदहाड़े उसे गोली मार दी.
कैसी विडंबना है कि एक ओर जब पूरी दुनिया समेत देशभर में महिला दिवस के मौके पर विभिन्न स्थानों पर जश्न मनाए जा रहे थे.. वहीं एक अज्ञात युवक ने दिनदहाड़े राधिका को गोली मार दी. इस घटना ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली मे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी. जिस देश की राष्ट्रपति एक महिला हो..जिस देश की संसद की अध्यक्ष स्वयं एक महिला हो..जिस देश की राजधानी की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हो..वहां पर ही महिलाएँ महफूज नहीं हैं ..दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी मानना पड़ा कि महिलाएँ दिल्ली मे सुरक्षित नहीं हैं.
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| शीला दीक्षित,मुख्यमंत्री,दिल्ली |
शीला ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत शर्म की बात है कि देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली ऐसा शहर है, जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. साथ ही शीला ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल से पल्ला झाड़ते हुए इसकी जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस पर डाल दी..साथ ही कहा कि दिल्ली पुलिस गृहमंत्रालय के अंतर्गत काम करती है.
वैसे महिला दिवस के दिन जब हर जगह महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की जाती है.. विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमाने वाली महिलाओं को विभिन्न समारोहों में सम्मानित किया जाता है..लेकिन बात जब उनकी सुरक्षा की आती है..तो सरकारें अपना पल्ला झाड़ते हुए नज़र आती है..अरे भई जब महिलाएं आपके राज्य की निवासी हैं..तो क्या उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी नहीं..फिर क्यों जब भी किसी महिला के साथ बदतमीजी होती है..कोई दुष्कर्म होता है..किसी की सरेराह हत्या होती है..तो फिर आप इसकी जिम्मेदारी लेने की बजाय किसी और विभाग पर क्यों डाल दी जाती है. वैसे दिल्ली में सरेराह किसी छात्रा को गोली मारने की ये कोई पहली घटना नहीं है..इससे पहले भी राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में महिलाओं के खिलाफ इसी तरह के मामले पेश आते रहे हैं. हर बार आरोपी की गिरफ्तारी की बात कहकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया जाता है..और संबंधित फाइल कुछ दिनों बाद पुलिस महकमे में धूल फांकती नज़र आती है.
लेकिन अब वक्त आ गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाए. सरकार को चाहिए वो ऐसे अपराधियों को.. अगर वो गिरफ्त में आते हैं तो सख्त से सख्त सज़ा दें..क्योंकि अधिकांश मामलों में आरोपी पकड़ से अमूमन बाहर ही रहते हैं. साथ ही नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी..उन्हें भी अपराधियों को पकड़वाने में सुरक्षा बलों का साथ देना चाहिए. तभी अपराधी अपने अंजाम तक पहुंचेंगे. अगर राधिका के मामले में किसी दिल्लीवासी ने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई होती..तो आज उसका हत्यारा सलाखों के पीछे होता..आप अपनी सोच में बदलाव लाईए..वक्त अपने आप बदलेगा.


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