Sunday, April 17, 2011


कोख के क़ातिल
धरती का भगवान इतना दरिंदा हो जाएगा..हमने कभी सोचा भी नहीं होगा..वो इतना घिनौना काम करेगा..चंद रुपयों के लालच में..कोख का सौदा कर देगा.. किसी को सुनकर यकीन भी नहीं हो रहा होगा.. जी हां... धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर इस तरह का कुकृत्य करेंगे..जो किसी महिला को मां बनने के सुख से वंचित कर दे...सुनकर रूह कांप जाती है..यकीन करना मुश्किल होता है.. लेकिन ये सोलह आने सच है..मामला राजस्थान के दौसा जिले का है..जहां के बांदीकुई क्षेत्र के चार निजी अस्पतालों पर आरोप लगा है कि उनके डॉक्टरों ने महज कुछ हजार रुपयों के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत पिछले छह महीने के भीतर गांवों की भोली-भाली करीब 226 महिलाओँ के गर्भाशय निकाल लिए.
ये डॉक्टर महिलाओँ के गर्भाशय निकालने का काम करते ही जाते अगर दौसा में संचालित अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के पदाधिकारी आरटीआई के तहत ये सूचना प्राप्त नहीं करते कि इन महिलाओं को कैंसर जैसी घातक बीमारी का भय दिखाकर इनकी बच्चे दानी निकाल ली जाती थी. कोख के ये काले कारोबारी औरतों को भय दिखाकर बच्चेदानी का ऑपरेशन करवाने को विवश करते थे..वैसे इन महिलाओं को पता तक नहीं होता था कि उन्हें बीमारी से निजात दिलाने के नाम पर ऑपरेशन करने वाले ये डॉक्टर उनके साथ धोखा कर रहे थे..वे बेचारी महिलाएँ नहीं जानती थीं कि ये लोग उनकी जान बचाने के नाम पर उन्हें जिंदगी भर तिल-तिल मरने के लिए छोड़ देने का रास्ता साफ कर रहे थे.. इन धोखेबाज़ डॉक्टरों ने इससे पहले न जाने कितनी ही महिलाओं के गर्भाशय निकालकर उन्हें मातृत्व सुख से वंचित करने का कुकृत्य किया हो. इन दरिंदों ने न जानी कितनी ही भोली भाली महिलाओं को मातृत्व के उस सुख से वंचित कर दिया हो..जिसका इंतजार हर औरत को होता है..हर औरत मां बनने के बाद ही अपने जीवन को धन्य मानती है..महज कुछ हजार रुपयों के लिए इन दरिंदों ने जिस घिनौने काम को अंजाम दिया है..उसके लिए इन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए..इलाज के नाम पर महिलाओँ का शोषण करने वाले इन कोख के कातिलों को सज़ा मिलने से शोषित महिलाओँ का दुख तो कम नहीं होगा.. हां इन्हें सजा मिलेगी..तो आगे कोई और डॉक्टर..डॉक्टरी जैसे ईमानदार और पवित्र पेशे को बदनाम करने की कोशिश नहीं करेगा..और न ही रूपयों के लालच किसी मां की कोख का सौदा करने की हिम्मत कर पाएगा. उधर, मीडिया में ये मुद्दा आने के बाद सरकार थोड़ी हरकत में आई है..दौसा के सीएमएचओ ओ पी मीणा ने इस मामले की जांच की बात कही है..तत्काल प्रभाव से इन चारों निजी अस्पतालों की जननी योजना से संबंद्धता को अस्थाई तौर पर रद्द कर दिया गया है...और अगर जांच में अस्पताल दोषी पाए जाते हैं तो उनकी संबंद्धता स्थाई रुप से रद्द कर दी जाएगी..साथ ही अब ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह ये सुनिश्चित करे कि इस मामले का कोई भी दोषी बच न पाए.
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है
कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है

जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है

होश अपने का भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है

देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,
फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है

हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में
रास्ता है कि कहीं और चला जाता है

दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की
आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।
                                         सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

­संवेदनहीन समाज..मरती मानवता
कहते हैं इंसान-इंसान के काम आता है..और पड़ोसी-पड़ोसी के काम आता है..पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि आप मित्र बदल सकते हैं..पर पड़ोसी नहीं बदल सकते..लिहाज़ा पड़ोसी से आपके संबंध अच्छे होने चाहिए..लेकिन आज शहरी समाज में फ्लैट संस्कृति बड़ी तेजी से पनपी है. अगर तीन फ्लैट आमने-सामने एक ही माले पर हों...तो फ्लैट नंबर एक में रहने वाले को नहीं पता..कि फ्लैट नंबर दो में कौन रह रहा है..यही हाल फ्लैट नं तीन वाले का भी है..उसे भी नहीं मालूम होता कि नंबर एक और दो में कौन रह रहा है...लब्बोलुवाब यही है कि किसी को भी एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं मालूम होता. वैसे तेजी से भागती-दौड़ती जिंदगी में लोग अपने में ही इतने मशगुल होते हैं.. कि पता ही नहीं होता कि उनके अगल-बगल में क्या हो रहा है..हर कोई अपने में ही मस्त है..हर कोई अपनी ही फिक्र में जिंदगी के दिन काट रहा है.. जी हां..हमारी इसी मानसिकता के चलते उत्तरप्रदेश के नोएड़ा में एक सनसनीखेज वाकया सामने आया है. .जहां पिछले सात महीने से एक ही फ्लैट के भीतर दो बहने खुद को कैद करके रखती हैं.. लेकिन अगल-बगल वाले उनकी सुध नहीं लेते.  

मौत से जूझती जिंदगियां
हालांकि बाद में एक समाजसेवी संस्था की पहल पर पुलिस घर का दरवाज़ा तोड़कर इनकी सुध लेने पहुंचती तो है..लेकिन जब दरवाजा तोड़कर अंदर जाया जाता है..तो घर के अंदर का नज़ारा बेहद ही खौफनाक और दिल दहला देने वाला था..नज़ारा ऐसा था कि मानवता रो पड़े.. कमरे के अंदर से बदबू आ रही थी. एक बहन मरणासन्न हालत में सोफे पर पड़ी थी.. तो दूसरी की हालत भी काफी खराब थी..दरअसल सात महीने पहले इनके पिता जो कि सेना में एक कर्नल थे..कि मृत्यु हो गई थी..जिसके बाद इनके भाई के साथ भी इनका मनमुटाव हो गया..और वो भी इन्हें छोड़कर चला गया.. ये भी बताया जाता है कि दोनों बहनों ने भाई को पढ़ाने के लिए शादी भी नहीं की...भाई के घर छोड़कर चले जाने के बाद दोनों ही एकाकीपन का शिकार हो गईं..और खुद को कमरे में कैद कर लिया..फिलहाल बड़ी बहन की मौत हो चुकी है..और दूसरी मौत और जिंदगी के बीच झूल रही है...ये वाकया हमारे समाज को आइना दिखाने के लिए काफी है..धीरे-धीरे हमारे भीतर से इंसानियत का लोप होता जा रहा है...सभी लोग अपने दो रूम के फ्लैट में मस्त है..किसी को भी समाज और उसके भीतर रहने वालों के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं है..धीरे-धीरे समाज में एक-दूसरे के प्रति संवेदनाएं कम होती जा रही है..या फिर यूं कहें कि संवेदनाएँ मर सी गई हैं..तो शायद कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.. लेकिन क्या ये सही है कि हमारा समाज लोगों के प्रति संवेदनहीन हो जाए.. क्या हमारे भीतर अभी भी कोई नैतिकता नहीं बची हैं.. या वो भी सब पश्चिमी संस्कृति की ही भेंट चढ़ती जा रही है..क्या हम इतने खुदगर्ज हो गए हैं.. कि कोई शख्स हमारी आंखों के सामने परेशानी में हो...और हम अपनी आंखें मूंद कर आगे निकल जाए. हम भारतीय ऐसे तो न थे..फिर क्यों नोएडा का दिलदहलाने वाला वाकया हो गया..एक बार ज़रा ठहरकर इस बारे में सभी को सोचना होगा..क्योंकि जिस समाज में हम रहते हैं..जिस समाज का हम लोग एक अभिन्न अंग हैं...उस समाज के प्रति हमारे कुछ कर्तव्य भी है..अगली बार आप जब भी घर से निकले....और किसी शख्स को परेशानी में देखें तो एकबारगी ज़रूर सोचिएगा..उसके बारे में..मदद का हाथ बढ़ाने में कोई हर्ज भी नहीं है.. क्या पता हमारी छोटी सी पहल उसके लिए बहुत बड़ी मदद साबित हो.


Sunday, April 10, 2011



रालेगन का निराला संत..

अन्ना ने किया अनशन
झुक गई सरकार
उम्मीद जगी खत्म होगा अब भ्रष्टाचार
ये हैं जनता की हुंकार..


आमरण अनशन पर अन्ना हजारे
दो अप्रैल 2011 की रात को समूचा देश क्रिकेट विश्व कप के जीतने की खुशी में सड़कों पर जमकर जश्न मना रहा था..कभी न भूलने वाले इस दिन के जश्न की खुमारी अभी लोगों पर से पूरी तरह उतरी ही नहीं थी की एक बार फिर से लोग सड़कों पर उतर पड़े...लेकिन इस बार लोग जीत के जश्न के लिए नहीं बल्कि एक संघर्ष के लिए सड़कों पर उतरे थे.. न किसी प्रकार का शोर शराबा.. न किसी प्रकार की हिंसा.. चारों और नारे ही नारे सुनाई पड़ रहे थे.."अन्ना तुम आगे बढ़ो..हम तुम्हारे साथ हैं.. 

Monday, April 4, 2011

साकार हुआ सपना..


इस दुनिया के हम हैं सिकंदर
विश्व विजेता-2011     

सभी देशवासियों को क्रिकेट विश्व विजेता बनने पर हार्दिक बधाई..
खुशी ऐसी की रोके न रुके..
जीत का जूनून

ये टीम विश्व चैंपयन है.. 


Friday, April 1, 2011

121 करोड़ हुए हम..

भारत की जनसंख्या बीते एक दशक में 18.1 करोड़ बढ़कर अब 121 करोड़ यानी एक अरब 21 करोड़ हो गई है. जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पुरुषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ है.

इस बार की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है. यूपी की आबादी बीस करोड़ के लगभग है..जबकि महाराष्ट्र ग्यारह करोड़ तेईस लाख की आबादी के साथ दूसरे स्थान पर हैं..मजे की बात ये है कि अगर इन दोनों राज्यों की आबादी को जोड़ दिया जाए...तो इन दोनों की आबादी मिलकर अमेरिका की जनसंख्या से अधिक होगी. वैसे संतोष की बात ये है कि आबादी बढ़ने की हमारी रफ्तार कम हुई है और आजादी के बाद यह सबसे निचले स्तर पर है.