Sunday, April 10, 2011



रालेगन का निराला संत..

अन्ना ने किया अनशन
झुक गई सरकार
उम्मीद जगी खत्म होगा अब भ्रष्टाचार
ये हैं जनता की हुंकार..


आमरण अनशन पर अन्ना हजारे
दो अप्रैल 2011 की रात को समूचा देश क्रिकेट विश्व कप के जीतने की खुशी में सड़कों पर जमकर जश्न मना रहा था..कभी न भूलने वाले इस दिन के जश्न की खुमारी अभी लोगों पर से पूरी तरह उतरी ही नहीं थी की एक बार फिर से लोग सड़कों पर उतर पड़े...लेकिन इस बार लोग जीत के जश्न के लिए नहीं बल्कि एक संघर्ष के लिए सड़कों पर उतरे थे.. न किसी प्रकार का शोर शराबा.. न किसी प्रकार की हिंसा.. चारों और नारे ही नारे सुनाई पड़ रहे थे.."अन्ना तुम आगे बढ़ो..हम तुम्हारे साथ हैं.. 


भारत माता की जय..इंकलाब जिंदाबाद....अन्ना तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं." क्या बच्चे--क्या बूढ़े..क्या युवा--क्या महिलाएँ..हर कोई भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए अन्ना हजारे के समर्थन में आ गया था.. 

अन्ना के समर्थन में आए लोग
 जी हां..पांच अप्रैल 2011 से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त जनलोकपाल के गठन के लिए प्रख्यात गांधीवादी समाज सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ चुके थे.. अन्ना के साथ हजारों की तादाद में देश के कोने-कोने से पहुंचे लोग भी उनके साथ आमरण अनशन पर बैठे..पहले दिन के गुजरने के साथ-साथ अन्ना के समर्थन में उतरने वालों की तादाद में इजाफा होता रहा...दिल्ली के जंतर-मंतर पर ही नहीं,,बल्कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक..और उत्तरपूर्व से लेकर गुजरात तक लाखों की संख्या में लोग अन्ना के समर्थन में उतरने लगे..देश के कोने -कोने में दिन ढलने के साथ अन्ना के समर्थन में जनसैलाब उमड़ रहा था..



हर कोई वक्त निकालकर आंदोलन में शरीक हो कर मानों सरकार को कह रहा हो..कि बस अब तो बस करो..भ्रष्टाचार रोकने के लिए कुछ तो करो... अन्ना की मांग थी कि जनलोकपाल बिल के मसौदे को तैयार करने के लिए गठित समिति में नागरिक समाज के सदस्यों की भी भागीदारी पचास फीसदी की हो..और सरकार जनलोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए कमिटी के गठन के लिए नोटिफिकेशन जारी करे.. साथ ही सरकार जनलोकपाल बिल के गठन के लिए नागरिक समाज द्वारा सुझाए गए बिंदुओं पर विचार करे..


अनशन पर बैठे अन्ना
 पहले तो सरकार ने अन्ना की मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया..कुछ माननीय नेताओं ने तो अन्ना के आंदोलन को अपरिपक्वव और ग़लत तरीके वाला तक बता दिया..तो कुछ बोल अन्ना ब्लैकमेल कर रहे हैं.. लेकिन समूचे देश में आंदोलन को मिलने वाले समर्थन और दिन --दिन उसकी जनव्यापकता को देखते हुए आंदोलन के पांचवें दिन नौ अप्रैल 2011 को सरकार को अन्ना की अनशन की शक्ति के आगे झुकना पड़ा..और जनलोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए संयुक्त समिति के गठन का नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा.. अन्ना जीत गए..अन्ना ने पूरे 97 घंटे के बाद सौम्या नाम की एक बच्ची के हाथों नींबू पानी पीकर अपना अनशन तोड़ा..लेकिन उससे पहले अन्ना ने उन सभी लोगों का अनशन तुड़वाया जो इस संघर्ष में अन्ना के साथ थे.. 


अन्ना को नींबू पानी पिलाती हुईं नन्हीं सौम्या
अन्ना के साथ ही ये उन 121 करोड़ भारतीयों की भी जीत है..जिन्हें दैनिक जीवन में किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार से दो-चार होना पड़ता है..आज़ादी के बाद 1974 में जेपी आंदोलन के बाद अन्ना का ये आंदोलन ही एकमात्र ऐसा आंदोलन था..जिसमें इतनी बड़ी तादाद में नागरिक समाज ने भाग लिया हो...इस आंदोलन में किसी भी प्रकार की कोई हिंसा नहीं हुई..और देश के कोने-कोने से इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला..और इसी के साथ अन्ना के साथ पूरे देश ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा लिया.. 

अब उम्मीद बंधन लगी है कि धीरे-धीरे ही सही,,लेकिन आने वाले कुछ सालों में देश से भ्रष्टाचार खत्म होगा..हालांकि ये अभी भी चुनौतीपूर्ण है..लेकिन जब 121 करोड़ देशावासी किसी सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए दृढ़-संकल्प लेंगे..तो मजाल है कि उसका खात्मा न हो..अन्ना ने एक बार फिर से देशवासियों को उनकी ताकत से वाकिफ करा दिया..साथ ही सरकार को भी अन्ना के इस आंदोलन से आईना देखने को मिल गया..कि वो जनता की ही नुमाइंदगी करती है..नेताओं को भी ये गुमान न हो कि वे सत्ता में हैं..तो मालिक हैं..वे हैं तो  जनता के नौकर ही..उन्हें अब ये याद ऱखने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए कि वे उसी जनता की नुमाइँदगी करते हैं..जिसने उन्हें चुनकर भेजा है..और वे जनता से ऊपर नहीं हैं..इतना ही नहीं..अन्ना के आंदोलन ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से महात्मा गांधी के सत्य और अंहिसा वाले पथ की याद भी दिला दी है..साथ ही दुनिया ने गांधी जी के सत्याग्रह के अस्त्र की ताकत देखने को मिली है..अब हम ही नहीं पूरी दुनिया कह रही है कि "रालेगन के संत तूने कर दिया कमाल”
रालेगन के संत"अन्ना हजारे"

जय हिंद..जय भारत

No comments:

Post a Comment